बिलासपुर में वन विकास निगम की हरित क्रांति
Green Revolution of Forest Development Corporation in Bilaspur
5 वर्षों में रोपे गए 27 लाख से अधिक पौधे, 951 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला हरित आवरण
अरपा नदी के संरक्षण के लिए विशेष अभियान शुरू
रायपुर, 08 मई 2026

पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र का विस्तार सतत भविष्य के लिए अनिवार्य है। इसमें वृक्षारोपण, जैव विविधता संरक्षण और जन जागरूकता प्रमुख हैं। शहरी क्षेत्रों में मियावाकी पद्धति से पौधारोपण, प्लास्टिक प्रतिबंध और जल प्रदूषण कम किया जा सकता है, जिससे स्वास्थ्य, समृद्धि और पारिस्थितिक संतुलन बना रहता है। वनों की रक्षा, बंजर भूमि का पुनरुद्धार और सामुदायिक उद्यान विकसित करना है।
छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के बिलासपुर जिले के (कोटा परियोजना मंडल) पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र के विस्तार में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विगत पांच वर्षों (2021 से 2025-26) के दौरान निगम ने जिले के विभिन्न अंचलों में योजनाबद्ध तरीके से 27 लाख 14 हजार 350 पौधों का रोपण कर 951.980 हेक्टेयर क्षेत्र को हरा-भरा कर दिया है।
वृक्षारोपण के प्रमुख आंकड़े और प्रजातियां
852 हेक्टेयर के 66 कक्षों में 21.30 लाख पौधे लगाए गए, जिनमें मुख्य रूप से बेशकीमती सागौन का रोपण किया गया। सघन और त्वरित वृद्धि के लिए नीलगिरी और सागौन के उन्नत क्लोनल पौधों का रोपण किया गया। विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों में 3.16 लाख से अधिक पौधे लगाकर ग्रीन कवर बढ़ाया गया।
अरपा नदी का संरक्षण- एक विशेष पहल
नदी पारिस्थितिकी को पुनर्जीवित करने के लिए वर्ष 2025-26 में अरपा नदी के तटों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत कम जगह में घने जंगल विकसित करने के लिए अरपा किनारे 3.620 हेक्टेयर में 20,300 पौधे रोपे जाएंगे। नदी के किनारों पर सघन ब्लॉक वृक्षारोपण और रामसेतु क्षेत्र में विशेष हरियाली विकसित की जाएगी, जिससे भू-क्षरण रुकेगा।
दूरगामी प्रभाव
वन विकास निगम के ये सतत प्रयास न केवल बिलासपुर के स्थानीय जलवायु संतुलन को बनाए रखने में मददगार साबित हो रहे हैं, बल्कि इससे भविष्य में प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता के संरक्षण का एक मजबूत आधार भी तैयार हो रहा है। निगम का यह अभियान प्रदेश की हरित छत्तीसगढ़ की संकल्पना को साकार करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।






