गेंदा की खेती से बढ़ी आय और बनी नई पहचान

Marigold cultivation increased income and created a new identity

गेंदा की खेती से बढ़ी आय और बनी नई पहचान

रायपुर, मई 2026

कभी पारंपरिक धान की खेती में सीमित आय और बढ़ती लागत से जूझने वाले महासमुंद जिले के किसान गितेश्वर टण्डन आज अपनी मेहनत, नई सोच और आधुनिक खेती के दम पर क्षेत्र में नई पहचान बना चुके हैं। उनके खेतों में खिले गेंदा फूल अब सिर्फ खुशबू ही नहीं फैला रहे, बल्कि समृद्धि और आत्मनिर्भरता की नई कहानी भी लिख रहे हैं।

महासमुंद विकासखंड के ग्राम फूलवारी (बावनकेरा) निवासी प्रगतिशील कृषक गितेश्वर टण्डन पहले पारंपरिक तरीके से धान की खेती करते थे। मौसम की अनिश्चितता, खेती की बढ़ती लागत और अपेक्षाकृत कम लाभ के कारण उन्हें मेहनत के अनुरूप आमदनी नहीं मिल पा रही थी। खेती से परिवार का गुजारा तो हो रहा था, लेकिन आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं आ पा रहा था।

इसी बीच उन्होंने समय के साथ खेती में बदलाव लाने का निर्णय लिया। वर्ष 2025-26 में उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत पुष्प क्षेत्र विस्तार-गेंदा योजना का लाभ उठाया। उद्यानिकी विभाग से पौध सामग्री प्राप्त होने के बाद उन्होंने करीब दो एकड़ भूमि में आधुनिक तकनीक के साथ गेंदा फूल की खेती शुरू की। यही फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

आज गितेश्वर टण्डन लगभग 50 क्विंटल गेंदा फूल का उत्पादन कर चुके हैं। उनके खेतों में तैयार फूल महासमुंद और रायपुर की मंडियों तक पहुंच रहे हैं, जहां उन्हें अच्छा बाजार मूल्य मिल रहा है। जिस भूमि से पहले धान की खेती में लगभग 25 हजार रुपये प्रति एकड़ तक लाभ होता था, वहीं अब गेंदा खेती से उन्हें करीब 64 हजार रुपये प्रति एकड़ तक की आय प्राप्त हो रही है।

गितेश्वर की सफलता केवल आर्थिक उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बदलती सोच और नवाचार की प्रेरणादायक मिसाल भी बन गई है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों और शासकीय योजनाओं का सही तरीके से उपयोग करें, तो खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है। अब उनके गांव और आसपास के क्षेत्रों के कई किसान भी पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। गितेश्वर टण्डन आज क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी सफलता की खुशबू अब खेतों से निकलकर पूरे इलाके में फैल रही है।,