'कम जीएसटी दरों से ऑपरेशनल लागत में आएगी कमी' Budget 2025 से MSME सेक्टर को ये हैं उम्मीदें

'Operational costs will be reduced due to low GST rates' These are the expectations of the MSME sector from Budget 2025

'कम जीएसटी दरों से ऑपरेशनल लागत में आएगी कमी' Budget 2025 से MSME सेक्टर को ये हैं उम्मीदें

इंदौर।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 31 जनवरी से शुरू होने वाले संसद के बजट सत्र के एक दिन बाद फरवरी में संसद के पटल पर वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट पेश करेंगी। इस बजट के लेकर व्यापारिक क्षेत्र अपने-अपनी अपेक्षाएं बता रहे हैं।

वित्त मंत्री ने इस बजट से पहले वित्त, स्वास्थ्य सेवा, एमएसएमई, सार्वजनिक संगठनों, प्रौद्योगिकी, इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ बैठकें की हैं। इस बीच एमएसएमई क्षेत्र के स्टेकहॉल्डर्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों ने भी अपनी विशेष मांगें सरकार से की हैं।

इन सभी क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने इस बार के केंद्रीय बजट में ऐसी सुधारों की उम्मीद जताई है, जो देश की आर्थिक वृद्धि में तेजी लाने और रोजगार को बढ़ावा देने में सहायक हों।

एमएसएमई क्षेत्र की मांगें

भारत में एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योग) का योगदान देश की अर्थव्यवस्था में बहुत है। ये उद्योग न केवल रोजगार देने मदद करते हैं, बल्कि निर्यात को भी बढ़ावा देते हैं। एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े कई उद्योग प्रतिनिधियों ने केंद्रीय बजट 2025-26 से कुछ अहम अपेक्षाएं की हैं।

वंडरशेफ के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक रवि सक्सेना ने सरकार से अनुपालन बोझ को कम करने की अपील की है। उन्होंने कि अनुपालन बोझ को कम करने से इन उद्योगों की वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही उन्होंने निर्यात को प्रोत्साहन देने और उत्पादन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना में विस्तार करने मांग की है।

उनका मानना है कि यह कदम मैन्युफैक्चरिंग को गति देगा। भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में दूसरी बड़ी कंपनियों से लड़ने लायक बनाएगा।

एमएसएमई के प्रतिनिधियों ने उद्योग कर सुधारों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि स्टील, एल्यूमीनियम और प्लास्टिक जैसे आवश्यक इनपुट्स तक बेहतर पहुंच एमएसएमई के लिए जरूरी है, जिससे इनकी उत्पादन लागत को कम किया जा सके।

एमएसएमई क्षेत्र में विवादों के समाधान के लिए एक मजबूत स्ट्रक्चर बनाने की जरूरत है, जिससे व्यापार में रुकावटें कम हो सकें और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हो सके।