भावों को सुधारने से बढ़ेगी शांति : मनीष सागर
Peace will increase by improving emotions: Manish Sagar
रायपुर। टैगोर नगर पटवा भवन में गुरुवार को चातुर्मासिक प्रवचनमाला में युवा मनीषी मनीष सागर महाराज साहब ने भावों को नहीं बिगाड़ने की सीख दी। उन्होंने कहा कि हमें सदैव सजग रहना है कि हमारे भाव नहीं बिगड़े। जरूरी नहीं हम शत प्रतिशत पुण्य ही करें। हमें अपने पुरुषार्थ से कोशिश करना है कि पाप जितना कम हो सके उतना कम करें।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि सदैव अच्छे निमित्त में रहो। शुभ निमित्त में आ गए तो पुण्य हो ही जाएगा। अच्छे निमित्त में अच्छे भाव करना हमारी जवाबदारी है। ऐसा ना सोचे कि अशुभ भाव से शुभ भाव में आ गए हैं। हमें शुद्ध भाव की ओर जाना है। हम अशुभ भाव से बचें और शुभ भाव में आ जाएं। इसके लिए थोड़ी जागृति व थोड़ा मनोबल चाहिए। हम धीरे-धीरे अपने जीवन में अशुभ बंध कम करते जाएंगे। पाप और पुण्य के बीच में भेद जरूरी है। हमें पाप से बचाना है पुण्य में रहना है।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि भावों को सुधारने से शांति बढ़ेगी। कर्म बंधन सुधरेंगे तो आने वाले समय में फल भी मिलेगा। सदैव पाप से बचने का प्रयास करो। पाप से मोक्ष नहीं हो सकता। यह भी जरूरी नहीं की पुण्य से भी मोक्ष होगा। पुण्य करना ही है लेकिन इससे मोक्ष हो ऐसा मत मानना। जो पर से अपने आप को अलग करेगा। वह उतना ही स्व में आएगा। पर के प्रभाव से मुक्त होता जाएगा। पर के प्रभाव से मुक्त होकर आनंद में आएगा।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि पुण्य आपको देव,गुरु व धर्म के सानिध्य में लाएगा। देव, गुरु और धर्म के सानिध्य में आकर आपके दोषों को दूर करने का पुरुषार्थ जागेगा। भावों को सुधारने की जगृति आएगी। भाव तीन तरह के होते हैं। अशुभ, शुभ और शुद्ध भाव। अशुभ व शुभ भाव में हम संसार में प्रतिक्रिया करते हैं लेकिन शुद्ध भाव में कोई प्रतिक्रिया नहीं करते। शुद्ध भाव में हम सहज हो जाते हैं। भीतर से आनंदित व संतुष्टि ही शुद्ध भाव है।






