बस्तर जिला मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर

Bastar district is moving towards self-sufficiency in fish seed production

बस्तर जिला मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर

किसानों की आय में हो रही वृद्धि

रायपुर, 12 अगस्त 2025

प्रदेश में मत्स्य पालन विभाग द्वारा संचालित शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्रों और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से मछली पालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इस प्रगति से स्थानीय मछुआरों और किसानों को आर्थिक मजबूती मिल रही है तथा किसान मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

बस्तर जिले में मछली बीज उत्पादन के लिए दो प्रमुख केंद्र मत्स्य बीज प्रक्षेत्र बालेंगा और मोती तालाब मत्स्य बीज प्रक्षेत्र, जगदलपुर में संचालित हैं। दोनों केंद्रों ने उत्पादन में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। बालेंगा केंद्र ने वर्ष 2024-25 में 8 करोड़ स्पान और 60 लाख 32 हजार स्टैंडर्ड फ्राय का उत्पादन कर लक्ष्य को पार किया। वहीं वर्ष 2025-26 में अब तक 8 करोड़ 32 लाख स्पान और 2 लाख 32 हजार स्टैंडर्ड फ्राय का वितरण किया जा चुका है। इसी तरह मोती तालाब केंद्र ने वर्ष 2024-25 में  2 करोड़ 6 लाख 2 हजार 860 स्टैंडर्ड फ्राय का उत्पादन कर 1 करोड़ 80 लाख के लक्ष्य को पार किया, जबकि वर्ष 2025-26 में अब तक 60 लाख स्टैंडर्ड फ्राय का वितरण किया जा चुका है।

मत्स्य पालन विभाग द्वारा विभिन्न योजनाएं न केवल मछली उत्पादन बढ़ा रही हैं बल्कि किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त भी कर रही हैं। मौसमी तालाबों में मत्स्य बीज संवर्धन योजना के तहत निजी मत्स्य बीज उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु किसानों को 100 प्रतिशत अनुदान पर स्पान और अनुपूरक आहार सामग्री प्रदान की जाती है। वर्ष 2024-25 में इस योजना से 15 कृषक लाभान्वित हुए, जबकि 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 17 हो गई, योजना की बढ़ती लोकप्रियता दर्शाती है।

इसी तरह, मत्स्य अंगुलिका क्रय कर संचयन पर आर्थिक सहायता योजना के तहत 1 से 10 हेक्टेयर तक के तालाब वाले सभी वर्ग के मछुआरों को प्रति वर्ष 4 हज़ार रुपये व्यय पर 2 हज़ार रुपये का अनुदान दिया जाता है, जबकि शेष राशि कृषक द्वारा वहन की जाती है। योजना के अंतर्गत पैकिंग सहित प्रति कृषक 5,000 नग मछली बीज उपलब्ध कराए जाते हैं। वर्ष 2024-25 में 796 मत्स्य पालकों को 1 करोड़ 5 लाख 96 हजार मछली बीज प्रदान किए गए, जबकि 2025-26 में 1,000 इकाई वितरण का लक्ष्य रखा गया है। इन प्रयासों से बस्तर जिला न केवल मछली बीज उत्पादन में अग्रणी बन रहा है बल्कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।