पर्यटन विशेषज्ञ सुश्री किर्सी ने ग्रामीण महिलाओं संग किया महुआ संग्रहण, बस्तर की जैव विविधता और लोकसंस्कृति से हुए अभिभूत

Tourism expert Ms. Kirsi collected Mahua with rural women, was overwhelmed by the biodiversity and folk culture of Bastar.

पर्यटन विशेषज्ञ सुश्री किर्सी ने ग्रामीण महिलाओं संग किया महुआ संग्रहण, बस्तर की जैव विविधता और लोकसंस्कृति से हुए अभिभूत

संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ ने बस्तर प्रवास के दौरान ग्रामीण पर्यटन, बांस शिल्प और जनजातीय नृत्य पर किया संवाद; बस्तर पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर

रायपुर, 26 फरवरी 2026

बस्तर की समृद्ध जैव विविधता, जीवंत लोकसंस्कृति और ग्रामीण जीवन की आत्मीयता ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी गूंज दर्ज कराई है। संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध अंतरराष्ट्रीय पर्यटन विशेषज्ञ एवं ‘हिवा कोचिंग एंड कंसल्टिंग’ की संस्थापक सुश्री किर्सी ने अपने बस्तर प्रवास के दौरान ग्रामीण परिवेश को नजदीक से समझते हुए स्थानीय महिलाओं के साथ महुआ संग्रहण में सहभागिता की।

प्रवास के तीसरे दिन उन्होंने प्राकृतिक सौंदर्य के बीच ‘नेचर एंड एनवायरमेंट ऑब्जर्वेशन वॉक’ और बर्ड वॉचिंग गतिविधियों से दिन की शुरुआत की। स्थानीय गाइडों के साथ जंगल की पगडंडियों पर चलते हुए उन्होंने बस्तर की जैव विविधता, वन संपदा और पारिस्थितिकी तंत्र की विशेषताओं को समझा। ग्रामीण महिलाओं के साथ महुआ संग्रहण करते हुए वे खासा उत्साहित दिखीं और इसे आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त उदाहरण बताया।

दोपहर के समय बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का मनोहारी दृश्य तब सामने आया, जब धुरवा जनजातीय नृत्य दल ने पारंपरिक मंडरी, डंडारी और गुरगाल नाचा की आकर्षक प्रस्तुति दी। पारंपरिक वेशभूषा और वाद्य यंत्रों की थाप पर प्रस्तुत इन लोकनृत्यों ने विदेशी अतिथि को मंत्रमुग्ध कर दिया। पर्यटन बोर्ड के अधिकारियों ने उन्हें इन नृत्यों के ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व की विस्तृत जानकारी भी प्रदान की। इसके पश्चात उन्होंने पर्यटन विक्रेताओं, स्थानीय हितधारकों और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण संवाद किया। इस दौरान बस्तर में ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं, उत्पादों के परिष्करण, विपणन रणनीतियों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकास पर तकनीकी चर्चा हुई।

धुरमारास क्षेत्र में स्थानीय बांस शिल्पियों और कारीगरों के साथ आयोजित ‘तकनीकी इंटरैक्शन’ सत्र में सुश्री किर्सी ने बस्तर के प्रसिद्ध बांस हस्तशिल्प की बारीकियों को समझा और उत्पादों के गुणवत्ता संवर्धन एवं वैश्विक बाजार तक पहुंच बढ़ाने के सुझाव दिए। उन्होंने ‘कल्चर वॉक’ के माध्यम से ग्रामीण जीवन के विविध आयामों का अनुभव किया और स्थानीय आतिथ्य की सराहना की। दिन का समापन धुरवा डेरा होमस्टे में आयोजित डिब्रीफ सत्र के साथ हुआ, जहां पूरे दिन की गतिविधियों की समीक्षा की गई। जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित इस प्रवास का उद्देश्य बस्तर के ग्रामीण पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर सशक्त रूप से स्थापित करना है।

विशेषज्ञ ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बस्तर में प्रकृति, संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का अद्भुत समन्वय है। यदि इसे सुनियोजित रूप से वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जाए, तो यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का आकर्षक केंद्र बन सकता है। बस्तर का यह प्रवास न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान का माध्यम बना, बल्कि ग्रामीण महिलाओं, कारीगरों और स्थानीय समुदाय के आत्मविश्वास को भी नई ऊर्जा देने वाला साबित हुआ।