जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय के बर्न यूनिट में गंभीर रूप से झुलसे बच्चे को मिली नई जिंदगी
A child with severe burn injuries gets a new lease of life at the Burns Unit of Jawaharlal Nehru Hospital.
भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र का एडवांस बर्न केयर यूनिट आज छत्तीसगढ़ में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के लिए उम्मीद, संवेदना और विशेषज्ञ उपचार का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, प्रशिक्षित चिकित्सकीय टीम और मानवीय देखभाल के समन्वय से यह यूनिट उन मरीजों को भी नया जीवन देने में सफल हो रही है, जिनकी स्थिति कई बार अत्यंत गंभीर मानी जाती है।
हाल ही में यूनिट ने लगभग 50 प्रतिशत तक झुलसे एक बाल मरीज का सफल उपचार कर अपनी विशेषज्ञता और समर्पण का परिचय दिया। बर्न विभागाध्यक्ष एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. उदय धाबर्डे ने बताया कि अमेरिकन बर्न एसोसिएशन के अनुसार बच्चों में 20 प्रतिशत से अधिक तथा वयस्कों में 40 प्रतिशत से अधिक जलना अत्यंत गंभीर स्थिति मानी जाती है। संबंधित बाल मरीज कई दिनों तक अन्य अस्पतालों में उपचार के बाद सेप्टीसीमिया की अवस्था में जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय लाया गया था। शरीर के साथ-साथ मलद्वार और मूत्रमार्ग के आसपास का हिस्सा भी गंभीर रूप से प्रभावित हो चुका था, जिससे संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका बनी हुई थी।
ऐसी जटिल परिस्थिति में बर्न यूनिट की टीम ने केवल उपचार ही नहीं, बल्कि मरीज के संपूर्ण शारीरिक और मानसिक पुनर्वास पर कार्य किया। बार-बार ड्रेसिंग की आवश्यकता और असहनीय पीड़ा के बीच मरीज को हाई प्रोटीन एवं हाई फाइबर डाइट दी गई, वहीं नसों के माध्यम से पैरेंट्रल न्यूट्रिशन उपलब्ध कराया गया ताकि शरीर की रिकवरी प्रक्रिया को गति मिल सके। ड्रेसिंग के दौरान दर्द कम करने के लिए विशेष एनाल्जेसिक इंजेक्शन दिए जाते थे।
बच्चे के मानसिक तनाव को कम करने के लिए यूनिट में विशेष मानवीय वातावरण विकसित किया गया- प्ले हाउस में खिलौने, कार और मनोरंजन की व्यवस्था के साथ टीवी पर कार्टून फिल्में दिखाकर बच्चों का ध्यान दर्द से हटाने का प्रयास किया गया। वहीँ चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ राउंड के दौरान बच्चों से आत्मीय संवाद करते थे, वे उसे चॉकलेट देकर प्रोत्साहित करते हैं और उपचार को सहज बनाने का प्रयास करते। इलाज के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब बच्चे की स्थिति अत्यंत गंभीर थी। शरीर सूज चुका था और सांस लेने में भी कठिनाई हो रही थी। संयोग से उसी दौरान बच्चे का जन्मदिन आया। ऐसे भावुक क्षण में बर्न यूनिट की टीम ने अस्पताल के भीतर ही केक, बैलून और सजावट के साथ उसका जन्मदिन मनाया। सुस्त पड़े बच्चे ने मोमबत्ती बुझाई, केक काटा और कुछ क्षणों के लिए उसके चेहरे पर मुस्कान लौट आई। यह दृश्य न केवल चिकित्सकीय टीम बल्कि बच्चे के माता-पिता के लिए भी भावुक कर देने वाला था। अस्पताल से छुट्टी के समय माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे। उनका कहना था कि उन्होंने अपने बच्चे के बचने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी, लेकिन जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय का बर्न यूनिट उनके लिए संजीवनी साबित हुआ।
इस पूरे उपचार के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. विनीता द्विवेदी का विभाग को निरंतर मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा, वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कौशलेंद्र ठाकुर ने कहा कि एडवांस बर्न केयर यूनिट अस्पताल का अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है, जो गंभीर मरीजों के उपचार में पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है।
इस सफल उपचार में अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. अनिरुद्ध मेने, जूनियर ऑफिसर सुनीता साहु, वार्ड इंचार्ज शोभा सिस्टर सहित नर्सिंग स्टाफ, ड्रेसर, सेनेटरी वर्कर और अटेंडेंट्स की सामूहिक भूमिका महत्वपूर्ण रही।






