रायुपर : मेहनत की फसल पर उम्मीद का मिल रहा है पूरा दाम
Jaipur: The fruits of hard work are getting the full price of hope.
रायुपर, 22 नवम्बर 2025

इस वर्ष मौसम किसानों के लिए शुभ साबित हुआ। अच्छी बारिश ने उनकी मेहनत को फल दिया और खेतों में हरी-भरी धान की फसल लहलहाई। अब किसान धान को काटकर मिंजाई कर रहे हैं और धान को उपार्जन केंद्र में बेचने की तैयारी कर रहे हैं। फसल की हर बाली उनके लिए सिर्फ आय का साधन नहीं, बल्कि विषम परिस्थितियों से लड़कर आगे बढ़ने का साहस भी है। अब मेहनत की फसल पर उम्मीद के पूरे दाम मिल रहे हैं।
मेहनत का फल देखकर सारी थकान मिट जाती है
गांव के मेहनती किसान सियाराम ने इस वर्ष लगभग 4 से 5 एकड़ में धान की फसल ली है। उनकी पत्नी कंचनिया बाई भी खेती-किसानी में बराबरी से हाथ बँटाती हैं। दोनों सुबह से शाम तक खेत में पसीना बहाकर फसल को तैयार करते हैं। अब जब धान बोरी में भरकर बिकने के लिए तैयार है, कंचनिया बाई के चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान है। वे कहती हैं इस इलाके में धान लेना बहुत कठिन है। पानी की व्यवस्था नहीं, सब कुछ बारिश पर निर्भर, लेकिन मेहनत का फल देखकर सारी थकान मिट जाती है। घर में रखा धान पूरे परिवार के लिए उम्मीद का प्रतीक है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी को इंतज़ार है कि धान बिके और घर में आर्थिक राहत आए।
मौसम के भरोसे अपनी फसल सींचते हैं
यह कहानी है कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के दूरस्थ वनांचल ग्राम पतुरियाडॉंड में रहने वाले अधिकांश किसानों का जीवन खेती पर ही टिका है। पहाड़ी क्षेत्रों की तरह ऊबड़-खाबड़ जमीन, सिंचाई की स्थायी व्यवस्था का अभाव और बारिश पर निर्भरता-ये सभी चुनौतियाँ हर वर्ष किसानों की मेहनत की परीक्षा लेती हैं। फिर भी, यहाँ के किसान हिम्मत नहीं हारते। कठिन परिस्थितियों में कड़ी मेहनत कर वे हल चलाते हैं, बीज बोते हैं और उम्मीद की एक डोर के सहारे मौसम के भरोसे अपनी फसल सींचते हैं।
धान बिक जाने से कर्ज उतर जाता है
कंचनिया बाई बताती हैं कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा धान के प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य बढ़ाने और आदान सहायता राशि देने से किसानों को बहुत प्रोत्साहन मिला है। अब उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य मिलने की उम्मीद रहती है। वे कहती हैं कि-धान बिक जाता है तो कुछ कर्ज उतर जाता है, घर के जरूरी सामान आ जाते हैं और अधूरे काम भी पूरे हो पाते हैं।
किसानों को मेहनत का सम्मान मिला
पतुरियाडॉंड के किसानों की यह कहानी सिर्फ खेती की नहीं, बल्कि विश्वास, साहस और संघर्ष की कहानी है। कठिन परिस्थितियों में भी जमीन से जुड़े रहकर मेहनत करना, प्रकृति पर भरोसा रखना और हर साल नई उम्मीद के साथ फसल उगाना यही इन किसानों की वास्तविक शक्ति है। इस वर्ष की अच्छी फसल ने न सिर्फ उनकी मेहनत का सम्मान मिला है, बल्कि आने वाले समय में और मजबूती से खेती करने का उत्साह भी दिया है।






