अटल बिहारी वाजपेयी विवि में ‘खाद्य बर्बादी’ पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, अन्न को संसाधन मानने का संदेश
National seminar on 'Food Waste' at Atal Bihari Vajpayee University, message to consider food as a resource
बिलासपुर। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में ‘खाद्य हानि एवं बर्बादी’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का मंगलवार को सफल समापन हुआ। छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से आए विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और छात्रों ने खाद्य सुरक्षा और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर गहन मंथन किया।
सोच में बदलाव को बताया समाधान
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु डॉ. ए.डी.एन. वाजपेयी ने कहा कि खाद्य संकट का समाधान केवल तकनीक से नहीं, बल्कि समाज की सोच और जीवनशैली में बदलाव से संभव है। उन्होंने ‘अन्नं ब्रह्म’ की भारतीय अवधारणा का उल्लेख करते हुए अन्न के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने की अपील की।
‘वेस्ट टू वेल्थ’ और सर्कुलर इकोनॉमी पर जोर
कार्यक्रम की संयोजक रेवा कुलश्रेष्ठ ने ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ मॉडल पर प्रकाश डालते हुए बताया कि खाद्य अपशिष्ट से बायोडिग्रेडेबल उत्पाद, जैविक खाद और बायो-एनर्जी तैयार कर आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों ने दिए तकनीकी सुझाव
मुख्य अतिथि डॉ. एस.एस. सेंगर ने फसल कटाई के बाद होने वाली हानि को कम करने के लिए कोल्ड चेन, स्मार्ट स्टोरेज और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया। वहीं कुलसचिव डॉ. तर्णीश गौतम ने खाद्य बर्बादी को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए इसे कम करने की जरूरत बताई।
देशभर से 65 शोध पत्र प्रस्तुत
विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत कुमार पटेल ने बताया कि संगोष्ठी में देशभर से 65 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें खाद्य अपशिष्ट प्रबंधन के वैज्ञानिक, नीतिगत और व्यावहारिक समाधान शामिल थे।
समाज को मिला मजबूत संदेश
कार्यक्रम के अंत में सह-आयोजक डॉ. सौमित्र तिवारी ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। यह संगोष्ठी न केवल अकादमिक चर्चा तक सीमित रही, बल्कि समाज को अन्न के प्रति जिम्मेदार और जागरूक बनने का स्पष्ट संदेश भी दे गई।






