सलौनीकला धान उपार्जन केंद्र का फंड प्रभारी गायब, 2 दिनों तक अवरुद्ध रही खरीदी
Fund in-charge of Salonikala paddy procurement center missing, procurement blocked for 2 days
अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद तीसरे दिन हुआ समाधान
बिलाईगढ़। सलौनीकला धान उपार्जन केंद्र में फंड प्रभारी देवनारायण चंद्रा के अचानक लापता होने के कारण किसानों की धान खरीदी दो दिनों तक ठप रही। तीसरे दिन विभागीय अधिकारियों के हस्तक्षेप और हंगामे के बीच धान खरीदी पुनः शुरू की गई।
गायब हुए फंड प्रभारी, बढ़ा विवाद:
मामला तब गरमाया जब नये साल के पहले दिन फंड प्रभारी देवनारायण चंद्रा मंगलवार शाम 5-6 बजे के बीच धान उपार्जन केंद्र से अचानक गायब हो गए। इस दौरान केंद्र में नये प्रबंधक भरत चंद्रा की नियुक्ति और पूर्व प्रबंधक संजय साहू व फंड प्रभारी देवनारायण चंद्रा को हटाने की प्रक्रिया चल रही थी। विवाद उस समय और बढ़ गया जब देवनारायण चंद्रा के परिजनों ने भटगांव थाना पहुंचकर उनके अपहरण की आशंका व्यक्त करते हुए नये प्रबंधक और समिति के अध्यक्ष सहित अन्य पर आरोप लगाए।
धान खरीदी हुई बाधित:
फंड प्रभारी की गैरमौजूदगी के कारण केंद्र में उनकी आईडी से धान खरीदी नहीं की जा सकी। इसके चलते 1 और 2 जनवरी को किसानों की धान खरीदी पूरी तरह से रुक गई, जिससे किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
तीसरे दिन समाधान:
गुरुवार को संबंधित विभाग के आला अधिकारी और भटगांव पुलिस की टीम ने सलौनीकला धान उपार्जन केंद्र का दौरा किया। स्थिति को सामान्य करने के लिए घंटों की चर्चा और विवाद समाधान के बाद दोपहर 3-4 बजे के करीब किसानों की धान खरीदी दोबारा शुरू की गई। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि विवाद का प्रभाव किसानों पर न पड़े।
परिजनों ने उठाए सवाल:
देवनारायण चंद्रा के परिजनों ने नये प्रबंधक भरत चंद्रा की नियुक्ति पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि भरत चंद्रा के खिलाफ न्यायालय में प्रकरण लंबित होने के बावजूद उन्हें नियुक्त किया गया। इस पर अधिकारियों ने यह जवाब दिया कि नियुक्ति आदेश उच्च स्तर से प्राप्त निर्देशों के आधार पर की गई है।
जांच जारी:
फंड प्रभारी के गायब होने और विवाद से संबंधित आरोपों की जांच भटगांव पुलिस द्वारा की जा रही है। इस मामले में नये प्रबंधक और अन्य व्यक्तियों से भी पूछताछ की जा रही है।
किसानों की चिंता:
इस विवाद के कारण किसानों को अपने धान की बिक्री में हुई देरी का खामियाजा भुगतना पड़ा। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि जांच में क्या सच्चाई सामने आती है और ऐसे विवादों से भविष्य में कैसे बचा जा सकता है।






