आधुनिक खेती की ओर कदम : नैनो उर्वरक और स्वीट कॉर्न ने बदली रामचंद्र की किस्मत
A Step Towards Modern Farming: Nano Fertilizers and Sweet Corn Changed Ramachandra's Fortune
स्वीट कॉर्न की खेती से समृद्धि की नई मिसाल बने किसान रामचंद्र
रायपुर, 15 जून 2026
कोण्डागांव जिले के किसान अब पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाते हुए धान, सब्जियों और अन्य नगदी फसलों के साथ-साथ स्वीट कॉर्न की खेती कर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर रहे हैं। जिले में कृषि के क्षेत्र में हो रहे इस सकारात्मक बदलाव का एक प्रेरणादायक उदाहरण बड़ेराजपुर विकासखंड के ग्राम मारंगपुरी निवासी किसान श्री रामचंद्र साहू हैं, जिन्होंने स्वीट कॉर्न की खेती को अपनाकर आर्थिक समृद्धि की नई पहचान बनाई है।
श्री रामचंद्र साहू पिछले तीन वर्षों से स्वीट कॉर्न का उत्पादन कर रहे हैं। उनके बेटे श्री राजेन्द्र साहू ने बताया कि बाजार में इसकी बढ़ती मांग और बेहतर लाभ को देखते हुए इस वर्ष लगभग ढाई एकड़ भूमि में अशोका किस्म के स्वीट कॉर्न की खेती की है। इसके लिए उन्होंने लगभग 7 किलोग्राम बीज का उपयोग किया, जिस पर लगभग 21 हजार रुपये की लागत आई। आधुनिक खेती की पद्धतियों को अपनाते हुए उन्होंने फसल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया, जिसका सकारात्मक परिणाम उन्हें बेहतर उत्पादन और आय के रूप में प्राप्त हो रहा है।
उन्होंने बताया कि सामान्य मक्का की तुलना में स्वीट कॉर्न की बाजार में मांग अधिक रहती है। तैयार फसल का प्रत्येक भुट्टा लगभग 7 रुपये प्रति नग की दर से विक्रय होता है। अप्रैल से जुलाई के बीच तैयार होने वाली इस फसल से उन्हें एक सीजन में लगभग दो लाख रुपये तक की आय प्राप्त होती है। कम समय में बेहतर लाभ मिलने के कारण स्वीट कॉर्न किसानों के लिए लाभकारी विकल्प के रूप में उभर रही है। फसल की गुणवत्ता एवं उत्पादन बढ़ाने के लिए श्री साहू नैनो यूरिया का भी उपयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार नैनो यूरिया के प्रयोग से फसल की वृद्धि बेहतर हुई है तथा पौधों के विकास और उत्पादन में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। इसके साथ ही उन्होंने शासन की विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ लेकर अपनी खेती को और अधिक सशक्त बनाया है।
श्री रामचंद्र साहू को कृषि विभाग की योजनाओं के अंतर्गत शैलो ट्यूबवेल तथा स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली का लाभ भी प्राप्त हुआ है। इन सुविधाओं के माध्यम से सिंचाई व्यवस्था मजबूत हुई है, जिससे कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव हो रही है और फसल उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। आधुनिक सिंचाई तकनीकों के उपयोग से खेती की लागत में कमी आने के साथ-साथ जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। कोण्डागांव जिले में कृषि के क्षेत्र में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। किसान अब धान और पारंपरिक फसलों के साथ सब्जी उत्पादन, स्वीट कॉर्न तथा अन्य लाभकारी फसलों की खेती की ओर भी अग्रसर हो रहे हैं। आधुनिक तकनीकों, उन्नत बीजों, नैनो उर्वरकों और सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों के उपयोग से किसानों की आय में वृद्धि हो रही है तथा खेती अधिक लाभकारी बन रही है।






