राजभवन के शिविर में डॉ. अरविन्द नेरल का 125वां रक्तदान

Dr. Arvind Neral donated blood for the 125th time at the Raj Bhavan camp

राजभवन के शिविर में डॉ. अरविन्द नेरल का 125वां रक्तदान

रायपुर। डॉ. अरविन्द नेरल ने आज राजभवन में संचालित हो रहे रक्तदान शिविर में अपने जीवन का 125वां रक्तदान करके रक्तदान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस रक्तदान शिविर का शुभारंभ माननीय राज्यपाल  रमेन डेका एवं राज्य की प्रथम महिला श्रीमती रानी डेका काकोटी की गरिमामय उपस्थिति में डॉ. अरविंद नेरल के रक्तदान से किया गया। इस अवसर पर चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर के अधिष्ठाता डॉ. विवेक चौधरी, अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर, डॉ. एस. बी.एस. नेताम, डॉ. रविकांत दास एवं अन्य चिकित्सा शिक्षक उपस्थित थे। रकतदान प्रोत्साहन के लिये डॉ. अरविन्द नेरल द्वारा प्रकाशित किताब "तुम मुझे खून दो" माननीय राज्यपाल महोदय को सप्रेम भेंट की गई। राज्यपाल महोदय ने रक्तदान के क्षेत्र में डॉ. नेरल द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना की। यह दो दिवसीय रक्तदान शिविर राजभवन के दरबार हाल में चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर के पैथोलॉजी विभाग के अंतर्गत संचालित मॉडल ब्लड बैंक के तकनीकी सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसमें डॉ. अमित भारद्वाज, डॉ. अविरल मिश्रा और टेक्नीशियनों की सराहनीय भूमिका रही।

डॉ. नेरल, पं.ज.ने. स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर के पैथोलॉजी विभाग के प्रोफेसर विभागाध्यक्ष हैं। संभवतः 125 बार रक्तदान करना किसी भी चिकित्सक और शिक्षक के लिए एक रिकार्ड है। वे 23 वर्ष की उम्र से लगातार समय-समय पर रक्तदान करते रहे हैं। रक्तदान करने के अलावा डॉ. नेरल रक्तदाताओं को प्रोत्साहित करने व रक्तदान से संबंधित जिज्ञासाओं और शंकाओं के वैज्ञानिक समाधान के लिये लगातार प्रयासरत रहते हैं। उन्होंने अनेक रक्तदान शिविरों के आयोजन किये हैं और महाविद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं में रक्तदान संबंधित व्याख्यान दिये हैं। समाचार पत्र-पत्रिकाओं, आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से भी प्रेरक लेख और साक्षात्कार दिये हैं। मुंबई से प्रसारित विविधभारती के कार्यक्रम "सेहतनामा' से रक्तदान की महत्वपूर्ण जानकारियों से युक्त उनका एक कार्यक्रम प्रसारित किया गया था, जिसे समय-समय पर पुनः प्रसारित किया जाता रहा है। रक्तदान संबंधित वैज्ञानिक मालूमात, स्लोगन, कहानियों, कोटेशन व कविताओं से सुसज्जित एक किताब "तुम मुझे खून दो" डॉ. नेरल ने प्रकाशित की है।